नई दिल्ली:
देश की राजनीति में उस वक्त जबरदस्त भूचाल आ गया, जब अंतरराष्ट्रीय AI Impact Summit के दौरान युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन किया। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ सत्ताधारी दल BJP को आक्रामक होने का मौका दिया, बल्कि विपक्षी खेमे में भी असहजता और मतभेद साफ दिखाई देने लगे।
इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में हुए प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी अब कई सवाल खड़े कर रही है।

पीएम मोदी का हमला: “आप पहले से ही राजनीतिक रूप से निर्वस्त्र हैं”
मेरठ में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर करारा प्रहार करते हुए कहा:
“कांग्रेस को और कपड़े उतारने की ज़रूरत नहीं है, वो पहले से ही राजनीतिक रूप से पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।”
पीएम मोदी ने बिना नाम लिए कहा कि देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई, और यह कृत्य विपक्ष की “निराशा और दिशाहीनता” को दर्शाता है।
BJP नेताओं ने इसे
- “राष्ट्रीय शर्म”
- “वैश्विक मंच का दुरुपयोग”
- “अराजक राजनीति”
करार दिया।
पुलिस कार्रवाई और कानूनी मोर्चा
दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए युवा कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। बाद में अदालत ने चार आरोपियों को पाँच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ spontaneous protest नहीं बल्कि पूर्व-नियोजित साजिश हो सकती है, जिसकी जांच जारी है।
राहुल गांधी की चुप्पी: रणनीति या मजबूरी?
इस पूरे विवाद में सबसे ज़्यादा चर्चा राहुल गांधी की चुप्पी को लेकर है।
जहाँ BJP लगातार हमलावर है, वहीं कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अब तक कोई सीधा और स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
- कांग्रेस डैमेज कंट्रोल मोड में है
- पार्टी अंतरराष्ट्रीय मंच पर हुई घटना को लेकर असहज है
- खुला समर्थन देने से वैश्विक छवि को और नुकसान हो सकता है
विपक्ष भी बंटा: समर्थन कम, असहमति ज़्यादा
हैरानी की बात यह रही कि INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने भी इस विरोध के तरीके पर सवाल उठाए।
कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि:
“विरोध का अधिकार है, लेकिन मंच और तरीका भी उतना ही ज़रूरी होता है।”
इससे साफ है कि कांग्रेस को न सिर्फ BJP से बल्कि सहयोगियों से भी आलोचना झेलनी पड़ रही है।
🌍 अंतरराष्ट्रीय मंच पर विवाद, भारत की छवि पर सवाल
AI Impact Summit में विदेशी प्रतिनिधि, टेक्नोलॉजी लीडर्स और नीति-निर्माता मौजूद थे। ऐसे में इस प्रदर्शन को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि:
- क्या इससे भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचा?
- क्या विरोध की यह शैली उद्देश्य से ज़्यादा नुकसानदेह साबित हुई?
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है — जहाँ एक वर्ग इसे “युवा आक्रोश” बता रहा है, तो दूसरा वर्ग इसे “राजनीतिक अपरिपक्वता” कह रहा है।
राजनीतिक संदेश साफ है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विवाद 2026 की राजनीति में एक बड़ा नैरेटिव सेट कर सकता है:
- BJP इसे राष्ट्रवाद बनाम अराजकता के रूप में पेश कर रही है
- कांग्रेस युवाओं की नाराज़गी को मुद्दा बताने की कोशिश में है
लेकिन फिलहाल, पब्लिक डिस्कोर्स में कांग्रेस बैकफुट पर और BJP आक्रामक मोड में दिख रही है।
AI समिट का शर्टलेस प्रोटेस्ट अब सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतीक बन चुका है — जो यह तय कर सकता है कि आने वाले महीनों में विपक्ष की रणनीति क्या होगी और सत्ता पक्ष किस नैरेटिव को आगे बढ़ाएगा।
(रिपोर्ट: The Story Window | राजनीति डेस्क) / Author: Akshay Srivastava