साल 2014 में जब Narendra Modi ने सत्ता संभाली, तब देश बदलाव चाहता था। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी पिछली सरकार, धीमी फैसले लेने की प्रक्रिया और आर्थिक निराशा के बीच लोगों ने एक ऐसे नेता को चुना जो तेज, आक्रामक और निर्णायक दिखता था।
12 साल बाद तस्वीर काफी साफ है।
यह दौर उपलब्धियों से भरा रहा। लेकिन विवादों और आलोचनाओं से भी।
मोदी सरकार ने भारत को कई क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ाया, लेकिन कुछ मोर्चों पर गंभीर सवाल भी खड़े हुए। यही वजह है कि यह सरकार जितनी लोकप्रिय रही, उतनी ही बहसों में भी रही।
उपलब्धियां: जहां मोदी सरकार ने बड़ा असर छोड़ा
1. इंफ्रास्ट्रक्चर का अभूतपूर्व विस्तार
अगर मोदी सरकार की सबसे दिखाई देने वाली उपलब्धि पूछी जाए, तो जवाब शायद इंफ्रास्ट्रक्चर होगा।
पिछले 12 वर्षों में:
- एक्सप्रेसवे तेजी से बने
- रेलवे स्टेशन आधुनिक हुए
- वंदे भारत ट्रेनें शुरू हुईं
- एयरपोर्ट नेटवर्क बढ़ा
- मेट्रो शहरों का विस्तार हुआ
सरकार ने विकास को सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जमीन पर दिखाई देने वाला बनाया।
छोटे शहरों की कनेक्टिविटी बढ़ी। यात्रा समय कम हुआ। लॉजिस्टिक्स सेक्टर मजबूत हुआ।
समर्थकों का कहना है कि भारत ने पहली बार बड़े स्तर पर “स्पीड आधारित विकास” देखा।
2. डिजिटल इंडिया और UPI क्रांति
मोदी सरकार की सबसे बड़ी सफलताओं में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को गिना जाता है।
UPI ने भारत की भुगतान प्रणाली बदल दी।
आज चाय वाले से लेकर बड़े मॉल तक QR कोड आम बात है।
डिजिटल इंडिया अभियान के तहत:
- सरकारी सेवाएं ऑनलाइन हुईं
- आधार आधारित सिस्टम मजबूत हुआ
- DBT के जरिए सीधे खाते में पैसे पहुंचे
- डिजिटल बैंकिंग तेजी से बढ़ी
भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क में शामिल हो गया।
यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं था। इसने गांवों तक डिजिटल व्यवहार पहुंचाया।
3. वेलफेयर योजनाओं की मजबूत पहुंच
मोदी सरकार ने गरीब और निम्न मध्यम वर्ग को सीधे जोड़ने वाली योजनाओं पर बड़ा फोकस किया।
मुख्य योजनाओं में:
- उज्ज्वला योजना
- पीएम आवास योजना
- आयुष्मान भारत
- मुफ्त राशन योजना
- जल जीवन मिशन
कोरोना काल में मुफ्त राशन वितरण ने करोड़ों परिवारों को राहत दी।
सरकार का दावा रहा कि DBT और टेक्नोलॉजी के कारण भ्रष्टाचार कम हुआ और लाभ सीधे लोगों तक पहुंचा।
4. वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत छवि
मोदी सरकार के दौरान भारत की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी काफी बढ़ी।
प्रधानमंत्री की विदेश यात्राएं, वैश्विक मंचों पर सक्रिय भागीदारी और G20 जैसे आयोजनों ने भारत की कूटनीतिक दृश्यता बढ़ाई।
अमेरिका, फ्रांस, जापान और खाड़ी देशों के साथ रिश्ते मजबूत हुए।
समर्थकों का मानना है कि भारत ने पहली बार खुद को “निर्णायक वैश्विक शक्ति” की तरह पेश किया।
5. बड़े राजनीतिक फैसले
मोदी सरकार ने कुछ ऐसे फैसले लिए जिन्हें ऐतिहासिक कहा गया।
जैसे:
- जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना
- राम मंदिर निर्माण
- तीन तलाक कानून
- नागरिकता संशोधन कानून (CAA)
समर्थकों ने इन्हें वैचारिक और राजनीतिक साहस के फैसले बताया।
विफलताएं और आलोचनाएं: जहां सरकार पर सवाल उठे
1. बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा बनी रही
सरकार ने विकास और निवेश पर जोर दिया, लेकिन रोजगार का मुद्दा लगातार चिंता का विषय बना रहा।
विशेषकर:
- युवा बेरोजगारी
- प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी
- सरकारी नौकरियों की कमी
- डिग्रीधारी युवाओं में निराशा
आलोचकों का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर तो तेजी से बना, लेकिन उतनी ही तेजी से रोजगार नहीं बने।
यही वजह है कि कई चुनावों में युवाओं की नाराजगी भी देखने को मिली।
2. नोटबंदी का विवाद
2016 की नोटबंदी मोदी सरकार के सबसे चर्चित और विवादित फैसलों में रही।
सरकार ने इसे:
- काले धन
- नकली नोट
- आतंक फंडिंग
के खिलाफ बड़ा कदम बताया।
लेकिन आलोचकों के अनुसार:
- छोटे व्यापार प्रभावित हुए
- असंगठित क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ
- नकदी आधारित अर्थव्यवस्था अचानक टूट गई
आज भी नोटबंदी को लेकर बहस खत्म नहीं हुई है।
3. महंगाई और आर्थिक दबाव
पेट्रोल-डीजल की कीमतें, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा के खर्च लगातार राजनीतिक मुद्दा बने रहे।
मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर बढ़ती लागत का असर महसूस किया गया।
सरकार ने इसे वैश्विक परिस्थितियों से जोड़ा, लेकिन विपक्ष ने इसे आर्थिक प्रबंधन की कमजोरी बताया।
4. सामाजिक ध्रुवीकरण के आरोप
मोदी सरकार के दौर में राजनीतिक और सामाजिक ध्रुवीकरण की बहस काफी तेज हुई।
आलोचकों ने आरोप लगाए कि:
- धार्मिक तनाव बढ़ा
- सोशल मीडिया पर आक्रामक राजनीति बढ़ी
- असहमति को राष्ट्रविरोध से जोड़ने का माहौल बना
हालांकि समर्थकों का तर्क रहा कि लंबे समय से दबाए गए मुद्दे अब खुलकर सामने आए।
5. लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल
विपक्ष और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने:
- मीडिया स्वतंत्रता
- जांच एजेंसियों के इस्तेमाल
- विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई
- संस्थागत स्वतंत्रता
को लेकर सवाल उठाए।
सरकार ने हमेशा इन आरोपों को राजनीति प्रेरित बताया।
लेकिन यह मुद्दा मोदी सरकार की सबसे बड़ी आलोचनाओं में शामिल रहा।
6. कोरोना की दूसरी लहर
कोविड महामारी के दौरान भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान चलाया। यह सरकार की बड़ी उपलब्धि मानी गई।
लेकिन दूसरी लहर में:
- ऑक्सीजन संकट
- अस्पतालों की कमी
- गंगा में शव मिलने की तस्वीरें
- प्रवासी मजदूर संकट
ने सरकार की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े किए।
कोरोना मोदी सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा साबित हुआ।
आखिर 12 साल बाद तस्वीर क्या कहती है?
मोदी सरकार ने भारत को कई मामलों में बदल दिया।
देश:
- ज्यादा डिजिटल हुआ
- ज्यादा केंद्रीकृत हुआ
- इंफ्रास्ट्रक्चर में आगे बढ़ा
- वैश्विक स्तर पर ज्यादा मुखर हुआ
लेकिन साथ ही:
- बेरोजगारी चिंता बनी रही
- राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ा
- लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बहस तेज हुई
समर्थकों के लिए यह निर्णायक नेतृत्व का दौर है।
आलोचकों के लिए यह अत्यधिक केंद्रीकरण और आक्रामक राजनीति का समय।
लेकिन एक बात तय है।
पिछले 12 साल भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली और सबसे ज्यादा चर्चा वाले दौरों में हमेशा गिने जाएंगे।
Author: Akshay Srivastava